जितना अधिक श्रम का विभाजन और मशीनरी का उपयोग बढ़ता है , उतना ही श्रमिकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढती है , और उतनी ही उनका वेतन कम होता जाता है। || The more the division of labor and the application Read more ›

मानसिक श्रम का उत्पाद – विज्ञान – हमेशा अपने मूल्य से कम आँका जाता है , क्योंकि इसे पुनः उत्पादित करने में लगने वाले श्रम-समय का इसके मूल उत्पादन में लगने वाले श्रम-समय से कोई सम्बन्ध नहीं होता . || Read more ›

शायद ये कहा जा सकता है कि मशीनें विशिष्ट श्रम के विद्रोह को दबाने के लिए पूंजीपतियों द्वारा लगाए गए हथियार हैं . || Machines were, it may be said, the weapon employed by the capitalists to quell the revolt Read more ›

ज़मींदार , और सभी लोगों की तरह, वहां से काटना पसंद करते हैं जहाँ उन्होंने कभी बोया नहीं . || Landlords, like all other men, love to reap where they never sowed. – Karl Marx

पूँजी मजदूर की सेहत या उसके जीवन की लम्बाई के प्रति लापरवाह है ,जब तक की उसके ऊपर समाज का दबाव ना हो . || Capital is reckless of the health or length of life of the laborer, unless under Read more ›

इसलिए पूंजीवादी उत्पादन टेक्नोलोजी विकसित करता है , और तरह-तरह की प्रक्रियाओं को सम्पूर्ण समाज में मिला देता है; पर ऐसा वो सिर्फ संपत्ति के मूल स्रोतों – मिटटी और मजदूर को सोख कर कर करता है . || Capitalist Read more ›

शाशक वर्ग को कम्युनिस्ट क्रांति के डर से कांपने दो . मजदूरों के पास अपनी जंजीरों के आलावा और कुछ भी खोने को नहीं है . उनके पास जीतने को एक दुनिया है . सभी देश के कामगारों एकजुट हो Read more ›

दुनिया के मजदूरों एकजुट हो जाओ ; तुम्हारे पास खोने को कुछ भी नहीं है ,सिवाय अपनी जंजीरों के. || Workers of the world unite; you have nothing to lose but your chains. – Karl Marx

पूँजी मृत श्रम है , जो पिशाच की तरह केवल जीवित श्रमिकों का खून चूस कर जिंदा रहता है , और जितना अधिक ये जिंदा रहता है उतना ही अधिक श्रमिकों को चूसता है . || Capital is dead labor, Read more ›

कोई भी जो इतिहास की कुछ जानकारी रखता है वो ये जानता है कि महान सामाजिक बदलाव बिना महिलाओं के उत्थान के असंभव हैं . सामाजिक प्रगति महिलाओं की सामजिक स्थिति, जिसमे बुरी दिखने वाली महिलाएं भी शामिल हैं ; Read more ›

लोकतंत्र और समाजवाद लक्ष्य पाने के साधन है, स्वयम में लक्ष्य नहीं. – जवाहरलाल नेहरु || Democracy and socialism are means to an end, not the end itself. – Jawaharlal Nehru

लोकतंत्र और समाजवाद लक्ष्य पाने के साधन है, स्वयम में लक्ष्य नहीं. – जवाहरलाल नेहरु || Democracy and socialism are means to an end, not the end itself. – Jawaharlal Nehru

मेरे मन में कोई संदेह नहीं है कि हमारे देश की प्रमुख समस्याएं गरीबी ,अशिक्षा , बीमारी , कुशल उत्पादन एवं वितरण सिर्फ समाजवादी तरीके से ही की जा सकती है . – सुभाष चन्द्र बोस || I have no Read more ›

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